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​bjp का मास्टर स्ट्रोक :-दुर्गा पूजा के बाद गठित होगा नया दल, बंगाल में होगा बीजेपी से समझौता

देश पश्चिम बंगाल

दुर्गा पूजा के बाद गठित होगा नया दल, बंगाल में होगा बीजेपी से समझौता

कोलकाता : दुर्गा पूजा के बाद पश्चिम बंगाल में जन्म लेगा एक नया क्षेत्रीय राजनीतिक दल. दल नया होगा लेकिन नेता पुराने होंगे. इस नए दल में तृणमूल कांग्रेस, कांग्रेस और सीपीएम के नेता शामिल होंगे. बनने वाला यह नया दल, पश्चिम बंगाल में प्रदेश भारतीय जनता पार्टी से चुनावी समझौता करेगा. या यूं कहें कि नया दल एनडीए का नया सदस्य होगा. इसकी तैयारी हालांकि काफी पहले से चल रही है लेकिन अब यह निर्णायक दौर में पहुंच गया है.

 कौन और क्यों होंगे शरीक
 तृणमूल कांग्रेस में सुप्रीमो ममता बनर्जी के बाद जिसकी हस्ती हुआ करती थी. फिलहाल पार्टी के राज्यसभा से साधारण सांसद हैं, नाम है मुकुल रॉय. मुकुल रॉय के साथ काफी संख्या में तृणमूल कांग्रेस के सांसद व विधायक इस नए दल के सदस्य होंगे. कौन कौन होंगे ? मुकुल रॉय फिलहाल नाम बताने को तैयार नही हैं. मुकुल रॉय ही इस पार्टी का नेतृत्व करेंगे. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सांसद व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी भी इस दल में शामिल होंगे. कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस में यदि समझौता होता है तो फिर सोमेन मित्रा भी इस दल में शामिल होंगे. अधीर और सोमेन दोनों ही सोनिया ममता की बढ़ती नजदीकियाें से नाराज व नाखुश हैं. सीपीएम के गौतम देब और ऋतोब्रतो बनर्जी के नाम की भी चर्चा है. गौतम देब, प्रकाश करात से दुखित हैं तो ऋतोब्रतो, मोहम्मद सलीम से दुखी हैं. दरअसल इस नए दल में शामिल होने वाले अधिकतर नेता अपनी अपनी पार्टी की नीतियों व नेतृत्व से असंतुष्ट हैं.

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बीजेपी ने क्यों दिखाई हरी झंडी 
 बीजेपी नही चाहती थी कि यह लोग सीधे बीजेपी में जॉइन करें. इसकी पहली वजह है कि इस नए दल में शामिल होने वाले अधिकांश नेताओं पर कुछ न कुछ आरोप है. खासकर तृणमूल कांग्रेस के मुकुल रॉय सहित जो भी नेता इस नए दल में आने वाले हैं उनका नाम शारदा, नारदा या रोजवैली जैसे घोटाले में है. येनेता सीबीआई और ईडी जैसी जांच एजेंसियों की जांच के घेरे में हैं. बीजेपी में इनके जॉइन करने से बीजेपी भ्रष्टाचार को मुद्दा नही बना पाती. इसलिए इन्हें नया दल बनाने की सलाह दी. दूसरी वजह है कि इस दल में शामिल होने वाले अधिकतर चेहरे बंगाल की राजनीति में बड़े व परिचित चेहरे हैं. ऐसे में बीजेपी को इन सभी को प्रदेश संगठन में शामिल करना मजबूरी और परेशानी का सबब बनता. लिहाज़ा क्षेत्रीय दल गठन कर हाथ मिलाने की हरी झंडी दिखा दी.

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