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वैंकैया नायडू नहीं लेंगे उपराष्ट्रपति पद की तनख़्वाह,बिना सैलरी करेंगे पूरे लर्यकल काम।जानिए क्यूँ

देश

देश ने नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति वैंकया नायडू का आज यानी 11 अगस्त को पहला दिन था. वेंकैया नायडू ने उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ ले ली है. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें शपथ दिलाई. शपथ लेने के बाद उन्होंने राज्यसभा के सभापति के रूप में कार्यभार संभालाl इस दौरान सभी नेताओं ने उनका स्वागत किया.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वेंकैया नायडू के स्वागत में भाषण करते हुए कहा कि वेंकैया पहले ऐसे उपराष्ट्रपति हैं जो आजाद भारत में जन्में हैंl उन्होंने अपने भाषण के दौरान एक शायरी भी पढ़ीl ‘मोदी ने कहा कि अमल करो ऐसा सदन में, जहां से गुजरे तुम्हारी नजरें, उधर से तुम्हें सलाम आए.’ मोदी ने कहा कि वेंकैया जी की तुकबंदी से हरकोई परिचित हैं.

सदन के नेता अरुण जेटली ने कहा कि मुझे याद है कि जब आप स्टूडेंट लीडर के तौर पर दिल्ली आते थे, तब मेरी आपसे मुलाकात होती थीl हमें वो दिन भी याद हैं जब विपक्ष के नेताओं को जेल में डाल दिया गया था. उन्होंने कहा कि राधाकृष्णन ने कहा था कि संसद में सिर्फ सरकार की बातें नहीं हो सकती हैं, सभी की बातें होनी चाहिएl उन्होंने कहा कि सभी को बोलने का मौका देना चाहिए, लेकिन सरकार को भी काम करने का मौका मिलना चाहिए.

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उपराष्ट्रपति को नहीं मिलती सैलरी दरअसल ऐसा कोई प्रवधान नहीं है कि उपराष्ट्रपति को सैलरी दी जाए, आपको बता दें उपराष्ट्रपति राज्यसभा के चेयरमैन भी होते हैं तो उन्हें इस पद के लिए 1 लाख 25 हजार रुपये प्रति माह वेतन मिलेगा. इसके साथ ही उप- राष्ट्रपति को रहने के लिए उन्हें एक फर्निश्ड हाउस दिया जाता है जो 6, मौलाना आजाद रोड पर स्थित है. इसके अलावा उन्हें मुफ्त मेडिकल सुविधा और ट्रैवल सुविधा मिलती है.

देश के उप- राष्ट्रपति जब रिटायर हो जाते हैं तो उन्हें पेंशन के रूप में उनकी सैलरी का 50% मिलता है. वहीं एमपी को भी रिटायरमेंट के बाद पेंशन के रूप में सैलरी की 50% मिलते हैं.भारत एक ऐसा देश है जो लगातार तरक्की की राह पर चल रहा है. यहाँ के प्रधानमंत्री देश के सभी धर्मों को लेकर चलने की बात करते रहें है. कुछ ऐसे लोग भी है जो जाति, धर्म ,अलगाव और नफरत फैलाने के आधार पर भी राजनीति करते है. सच्चाई तो इस बात में भी है कि भारत के सभी धर्म के लोग लगातार हर क्षेत्र में तरक्की कर रहे है. चाहे वो हिन्दू हो, मुसलमान हो, सिख हो हर भारतीय नागरिक आज तरक्की की राह पर चल रहा है. लेकिन कुछ राजनीतिक लोग और कुछ धर्म से जुड़े लोग अपने फायदे के लिए मुसलमान के अंदर भय पैदा करने में कोई कसर नही छोड़ रहे है. इसी सिलसिले में भारत के उपराष्ट्रपति अपने आखिरी इंटरव्यू में मुसलमानों को लेकर ऐसी बात कही है जो सुनकर आपके मन कुछ प्रश्न जरुर उठेंगे!

दरअसल भारत के उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी का कार्यकाल गुरूवार को ख़त्म हो रहा है. ऐसे में उपराष्ट्रपति रहते हुए हामिद अंसारी ने एक आखिरी इंटरव्यू दिया है जिसमें उन्होंने मुसलमानों के बेचैनी और असुरक्षा की बात कर रहे है. राज्यसभा के जाने माने पत्रकार करण थापर को दिए इंटरव्यू में अंसारी ने कहा कि देश के मुसलमानों में बेचैनी और असुरक्षा का माहौल है. जिसके लिए मैंने प्रधानमंत्री समेत मंत्रिमंडल के सदस्यों को भी अवगत कराया है. तीन तलाक के मुद्दे पर पर उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह एक सामाजिक बिचलन है कोई धार्मिक जरुरत नही है धार्मिक जरुरत स्पष्ट है. लेकिन सामाजिक रीत रिवाज़ इसमें घुसकर हालत कुछ ऐसी बना चुके है जो अत्यंत अवांछित है. कोर्ट को इस मामले में दखल नही देना चाहिए क्योंकि सुधार समुदाय के भीतर से ही होंगे.

कश्मीर के मुद्दे पर हामिद अंसारी ने कहा कि कश्मीर की समस्या एक राजनीतिक समस्या है इसका समाधान राजनीतिक तरीके से ही निकाला जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि मुसलमानों के अन्दर एक तरह की शंका है जिस तरह के बयान उन लोगो के खिलाफ दिए जा रहे है. मैंने देश के कई हिस्सों से यह बात सुनी पर यह बात उत्तर भारत के अधिकतर हिस्सों में सुनने को मिलती है. अब सोचने वाली बात यह है कि क्या देश का मुसलमान सच में असुरक्षित है? क्या देश के मुसलमान सच में डरा हुआ है? क्या देश के उपराष्ट्रपति के पद पर रहकर भी उन्हें किसी तरह की शंका है?

दरअसल आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अब देश में होने वाली किसी झगडे, बहस या इससे भी बड़ी घटनाओं को लेकर और पिछले दिनों हुए कुछ कथाकथित गोरक्षकों द्वारा जो शर्मनाक घटनाएं की गयी वो बेहद शर्मनाक तो है लेकिन इसका मतलब यह नही है कि उनको सजा नही मिली. अन्य घटनाओं की तरह इन घटनाओं को क्यों नही देखा जाता है? हर घटना को आज के समय हिन्दू मुस्लिम बताकर लोग बस राजनीति ही करना चाहते है. जमीनी हकीकत तो यह है कि सभी धर्म के लोग मिलकर काम कर रहे है. हामिद अंसारी की यह फोटो (जिसमें वो तिरंगे को सलामी नही दे रहे है) खूब वायरल हुई थी. इसी बात से हामिद अंसारी की कट्टरता को समझा जा सकता है कि एक देश एक बड़े और सम्माननीय पद पर बैठने के बाद भी उन्होंने तिरंगे को सलामी देना ठीक नही समझा.

कुछ लोग जो खुद को मुसलमानों का मसीहा समझते है या कुछ लोग उन्हें अपना मसीहा बना लिए है ऐसे लोग हर मुद्दे को धर्म से जोड़कर देश को बदनाम करने की साजिश रच रहे है. तीन तलाक के मुद्दे पर जहां महिलायें इस तरह पीड़ित है कि वो चाहती है कि कोर्ट उन्हें इन्साफ दे. ऐसे मसले पर हामिद अंसारी शाहब कह रहे है कि इस मामले में कोर्ट दखल न दे. सच बात तो यह है कि आज कल हर मुस्लिम नेता यह कहकर लोगो से हमदर्दी पाना चाहता है कि उसके उपर अत्याचार हो रहा है. उनको डराया जा रहा है. लेकिन ये सभी बातें राजनीतिक ही होती है. कुछ घटनाओं से देश भर के मुसलमानों और हिन्दुओ के उपर टिप्पणी करना बेहद गलत है.

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि उत्तर प्रदेश के जानेमाने डॉन मुख्तार अंसारी के चाचा हामिद अंसारी है. मुख्तार अंसारी उत्तर प्रदेश के एक बाहुबली नेता भी है जो अधिकतर जेल में ही रहते है . देश में हुए कई आतंकवादी घटनाओं में लिप्त अधिकतर मुसलमानों के होने के बावजूद कोई नेता ने यह नही कहा कि देश का हिन्दू खतरें में है. देशमें अन्य जगहों पर हिन्दुओ पर हुए हमलें में किसी ने नही कहा कि हन्दू खतरें में है!. दरअसल खतरें में कोई नही है सब भाईचारे के साथ रह रहे है. लेकिन कुछ घटनाएं हो रही है जो अन्य घटनाओं की तरह ही है कानून अपना काम कर रहा है. इसमें देश के मुसलमानों और हिन्दुओ के डरने और बेचैनी की कोई बात ही है.

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