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कश्मीर में स्वतंत्रता दिवस समारोह में जो हुआ उसे देख किसी कश्मीरी को गले नहीं लगाना चाहेंगे आप 

देश

देश में जहाँ एक तरफ 15 अगस्त को देश देशभक्ति के रंग में रंगा था वहीँ कश्मीर से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने शर्म से देशवासियों का सर झुका दिया है. दरअसल जम्मू कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर के बख्शी स्टेडियम में स्वतंत्रता दिवस का आयोजन रखा गया था.इस मौके पर मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती को गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया. बताया जा रहा है कि अठारह हजार की क्षमता वाले इस स्टेडियम में लगभग तीन हजार दर्शक ही मौजूद थे, लेकिन तभी…

राष्ट्रगान के सम्मान में नहीं खड़े हुए लोग अबतक मिली जानकारी के अनुसार जिस वक़्त स्टेडियम में राष्ट्रगान शुरू किया गया उस वक़्त कार्यक्रम में ज्यादातर लोग राष्ट्रगान के सम्मान में खड़े ही नहीं हुए. हाँ लेकिन मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती द्वारा ध्वजारोहण किए जाने के बाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश, कार्यक्रम में मौजूद विधायक, एमएलसी, नौकरशाह और राजनीतिक दलों के पदाधिकारी समेत कुछ और गणमान्य लोग थे जो कि राष्ट्रगान के सम्मान में खड़े हुये थे.

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कम संख्या में मौजूद थे दर्शक इस शर्मनाक काम के अलावा अगर इस कार्यक्रम में कुछ अच्छा ढूंढें तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यहां पहली बार परेड में भाग ले रही उत्तर प्रदेश पुलिस की टुकड़ी के लिए स्टेडियम में दर्शकों की कम संख्या चौंकाने वाली थी. उत्तर प्रदेश पुलिस दल का नेतृत्व कर रहे पुलिस उपाधीक्षक शिवदान सिंह ने कहा कि राज्य में स्वतंत्रता दिवस के मुख्य कार्यक्रम में कम लोगों का आना निराशाजनक है.

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पुलिस उपाधीक्षक ने कहा कि, “हमारे राज्य में, स्वतंत्रता दिवस उत्सव की तरह मनाया जाता है.” बता दें कि इससे पहले भी जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने मंगलवार, यानी की 15 अगस्त को कहा था कि उन्हें देश के संस्थानों पर पूरा भरोसा है और उन्होंने इस बात का भी विश्वास जताया कि उच्चतम न्यायालय संविधान के अनुच्छेद 35ए को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर देगा.

महबूबा मुफ्ती ने अपने भाषण में स्पष्ट किया कि जम्मू कश्मीर के विशेष दर्जे को यदि कोई खतरा हुआ तो सत्ता की लड़ाई या राजनीतिक विचाराधाराएं बाधक नहीं बनेंगी. उन्होंने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे पर विपक्षी पार्टी नेशनल कांफ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला की ‘पिता तुल्य सलाह’ का पालन किया है.

महबूबा मुफ़्ती ने कहा कि, “हमें देश के हर एक संस्थानों पर पूरा विश्वास है. हमने 1947 में वापस ले जाने वाले कुछ लोगों के कई प्रयासों को देखा है. वे एक मुद्दे या अन्य पर उच्चतम न्यायालय गये, लेकिन हमें हमारे उच्चतम न्यायालय पर भरोसा है जिसने पहले भी जम्मू कश्मीर के विशेष दर्जे को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज किया हैं.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि महबूबा मुफ्ती ने बख्शी स्टेडियम में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह को संबोधित करते हुए आगे कहा कि, “मुझे पूरा विश्वास है कि उच्चतम न्यायालय मौजूदा याचिका को खारिज कर देगा.” उन्होंने आगे बताया कि साल 1954 में राष्ट्रपति के आदेश से संविधान में शामिल अनुच्छेद 35ए राज्य विधायिका को स्थायी निवासियों को परिभाषित करने और उन्हें विशेष अधिकार देने की शक्ति देता है.

इसके साथ ही मुख्यमंत्री मुफ़्ती ने उम्मीद जतायी कि अब पाकिस्तान राज्य में हिंसा को भड़काने का काम बंद कर देगा जिससे भारत और पाकिस्तान के बीच वार्ता का रास्ता एक बार फिर से बन सकेगा. उन्होंने कहा कि, “सीमाओं पर गोलाबारी फिर शुरू हो गई है जिससे कई बेगुनाह लोगों की जानें जा चुकी हैं. साथ ही इन हमलों से कई स्कूल बंद है. कई लोगों को अपने गांवों को छोड़कर जाना पड़ा. ऐसी गंभीर स्थिति पर सवाल उठाते हुए महबूबा मुफ़्ती ने सवाल किया कि ऐसा लम्बे समय तक कैसे चलेगा?

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