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देश के बाहर ज़मीन ख़रीद रहे हैं मोदी और भाजपा,देश पर हमला हुआ तो घेर कर मारने का है प्लान जानिए कैसे…

देश

अपने आपको सुरक्षित करने के लिए और दुश्मनों से निपटने के लिए हर देश कुछ ऐसा करना चाहता है जिससे पूरे क्षेत्र में उसकी पकड़ बनी रहे. अमेरिका, चीन, रूस, चीन से लेकर ब्रिटेन तक हर देश खुद को सुरक्षित रखने के लिए कुछ ना कुछ ऐसा करते रहते हैं जो उनकी तरफ कोई ऊँगली न उठा सके. भारत भी अब अपनी सुरक्षा को लेकर पूरी तरह से तैयार है.

अटल जी ने भारत को सशक्त करने के लिए लिया था ये फैसलाभारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी जानते थे कि अगर अपना प्रभुत्व बढ़ाना है तो कुछ ऐसा करना पड़ेगा जिससे दुनिया उनकी तरफ आँख न उठा सके. वो भारत की सुरक्षा को लेकर चिंतित थे और इस चिंता को मिटाने के लिए उन्होंने एक योजना बनाई थी. उनका प्लान था कि भारत दुनिया में अपने आधिकारिक मिलिट्री बेस बनाए और उनका ये प्लान हक़ीकत में भी तब्दील हुआ जब भारत ने तजाकिस्तान के फारखोर में अपना पहला वायुसेना बेस स्थापित किया. ये भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि थी.

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भारत को ताकतवर बनाने के लिए कांग्रेस ने नहीं दिखाई कोई दिलचस्पीअटल बिहारी वाजपेयी जी ने भारत को सशक्त करने के लिए कई योजनाएं बनाई थीं लेकिन उन योजनाओं को वो पूरा नहीं कर पाए क्योंकि अगला चुनाव वो हार गए. इसके बाद कांग्रेस भारत की सत्ता में आई और कांग्रेस ने भारत की शक्ति को बढ़ाने के लिए किये गए अटल जी के कार्यों में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई. इसके बाद दस साल बाद जब नरेंद्र मोदी की सरकार भारत में आई तो उन्होंने अटल जी के अधूरे सपने को पूरा करने के लिए कदम बढ़ाने शुरू कर दिये.

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पीएम मोदी ने सत्ता में आते ही अटल जी के सपने को पूरा करने की तैयारी शुरू कर दीपीएम मोदी ने अपने कार्यकाल के शुरुआत में ही विदेशी दौरे शुरू कर दिये थे. इन विदेशी दौरों में सबसे अहम था उनका पांच दिनों का वो दौरा जिसमें पीएम मोदी मॉरीशस और सेशल्स गए. इस दौरे में पीएम मोदी ने दोनों देशों से राजनीतिक रिश्तों को सुधारने की बात की लेकिन कुछ ऐसा भी था जिसने इस दौरे को बहुत ख़ास बना दिया था.

पीएम मोदी ने लीज़ पर ले लिए दो द्वीप दरअसल इस दौरे में पीएम मोदी ने दोनों देशों से उस समझौते पर हस्ताक्षर करवाए जिसके अंतर्गत दोनों देश अपना एक-एक द्वीप भारत को लीज़ पर देंगे. जिसका मतलब ये है कि एक निश्चित समय के लिए ये द्वीप भारत के होंगे. भारत ने सेशल्स से अज़म्पशन और मॉरीशस से अगलेगा आइसलैंड लीज़ यानी पट्टे पर ख़रीदा. भारत ने दोनों देशों से इन द्वीपों पर आधारिक संरचना के सारे अधिकार भी लिए हैं. इन द्वीपों पर भारत की उपस्थिति भारत के लिए बहुत बड़ी रणनीतिक जीत है.

अब समुद्र में भारत की स्थिति और पकड़भारत में कच्चा तेल सबसे ज्यादा यूएई, सऊदी अरब, कुवैत और ईरान से आता है अमेरिका और चाइना भी इन देशों से तेल लेते हैं. ये सारा तेल पानी के जहाज़ों से लाया जाता है. नीचे दिख रही फोटो में काले रंग की रेखाएं भारत के ट्रांसपोर्ट रूट को दर्शा रही हैं, वहीँ लाल रेखाएं चाइना और नीली रेखाएं अमेरिका के रूट को दर्शा रही हैं. हल्के काले रंग के शेड में जो जगह आपको दिख रही है वो सोमालिया के समुद्री लुटेरों का इलाका है. ऐसे हालात में बहुत जरुरी हो जाता है तेलों से भरे समुद्री जहाज़ों को इन लुटेरों से बचाना. जो जगहें आपको हल्के सफ़ेद रंग के शेड में दिख रही हैं ये वो जगहें हैं जहाँ भारत की मिलिट्री का प्रभाव है या जहाँ भारत की पकड़ है. जो इलाका हल्के हरे रंग में दिख रहा है ये वो जगहें हैं जहाँ भारत की मिलिट्री का कंट्रोल है. जो जगहें हल्के नीले रंग में दिख रही हैं वो अमेरिका और इंग्लैंड के प्रभुत्व वाला क्षेत्र हैं. जो जगहें आपको हल्के लाल रंग में दिख रही हैं वहां चीन ने अपनी पकड़ बनाई हुई है या यूँ कहें अपनी मिलट्री तैनात की हुई है. जिससे साफ़ ज़ाहिर हो जाता है कि चाइना इंडिया को घेरना चाहता है.

चीन के इस प्लान को जिसे वो स्ट्रिंग ऑफ़ पर्ल्स कहता है और जिसके अंतर्गत वो अपने समुद्री जहाजों की सुरक्षा भी करता है और भारत को घेरने की कोशिश भी करता है को करारा जवाब देने के लिए भारत ने पीएम मोदी के नेतृत्व में स्ट्रिंग ऑफ़ फ्लावर्स योजना बनाई और इसी के अंतर्गत भारत ने सेशल्स से अज़म्पशन और मॉरीशस से अगलेगा आइसलैंड लीज़ पर लिए. भारत के लिए ये दोनों द्वीप रणनीतिक रूप से बेहद अहम हैं. सूत्रों की मानें तो अज़म्पशन द्वीप पर भारत एक ट्राईकमांड बेस बनाने की तैयारी में है. इस द्वीप पर भारतीयों के अलावा किसी को आने की इजाज़त नहीं है.

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