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इन 5 वकीलों ने राम रहीम को जेल तक तो पहुंचा दिया लेकिन इसके लिए उनकी फीस सुनकर आपके होश उड़ना तय है.

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भारत में कई बाबा हैं और इन बाबाओं के कई भक्त हैं. इन बाबाओं की सच्चाई जाने बगैर ही लोग इन पर विश्वास करने लग जाते हैं. जिसके बाद ये बाबा लोगों की भावनाओं के साथ खेलते हैं. इन बाबाओं को ज्ञान तो कुछ नहीं होता लेकिन ये लोग दूसरों को बहकाने में माहिर होते हैं. इन्हीं बाबाओं में से एक हैं बाबा राम रहीम जिनको लेकर हाल ही में कोर्ट ने आरोपी साबित कर दिया है.

साध्वी द्वारा चल रहे बाबा राम-रहीम पर रेप केस के मामले में शुक्रवार को सीबीआई की स्पेशल अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए बाबा पर आरोप पर सिद्ध कर दिया है. बाबा पर उनके ही आश्रम में रहने वाली एक युवती साध्वी ने यौन शोषण का आरोप लगाया था. केस पर सुनवाई करते हुए पंचकूला कोर्ट ने बाबा को दोषी करार दे दिया है. इस मामले में सोमवार 28 अगस्त को सुनवाई होगी.

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बाबा को जेल की सलाखों के पीछे तक पहुंचाने में कई लोगों का योगदान रहा. सरकार और प्रशासन को अबतक अपनी मुट्ठी में रखने का दंभ भरने वाले बाबा की ताबूत में पहली कील एक बहादुर बेटी ने प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखकर ठोकी थी. इसके बाद मानों कारवां सा शुरू हो गया जिसमे जुड़ते गए कई नाम जैसे जज, सीबीआई के अफसर, लगातार दबाव के बाद गवाही देने वाली बेटियों, पत्रकार रामचंद्र छत्रपति, पीड़ितों का केस लड़ने वाले वकील आदि के योगदान से बाबा राम रहीम को उसके अपराध की सजा मिली है.

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मिली जानकारी के अनुसार पीड़ित साध्वी ने 2002 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को गुमनाम बनकर एक चिट्ठी लिखी थी जिसमे उन्होंने राम रहीम के अपराध के बारे में सरकार को अवगत कराया था. अब करीब 15 साल बाद राम रहीम दोषी करार दिया गया है. ऐसे में इस लंबी कानूनी लड़ाई में पांच वकीलों जिनके नाम लेखराज ढोंट, अश्विनी बख्शी, आरएस चीमा और राजें सच्चर हैं उन्होंने इन बहादुर बेटियों का भरपूर साथ दिया.

कहते हैं जहाँ एक तरफ इस देश में कई गरीब कोर्ट तक सिर्फ इसलिए नहीं पहुंच पाते हैं, क्योंकि उनके पास वकीलों को देने के लिए फीस के पैसे नहीं होते हैं ऐसे में इस बात से एकदम विपरीत गुरमीत राम रहीम को काल कोठरी तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाने वाले इन पांच वकीलों ने पीड़ित बेटियों से केस की पैरवी करने के बदले कोई फीस नहीं ली है.

जी हाँ सुनने में बिलकुल नया सा लग रहा होगा लेकिन लेखराज ढोंट, अश्विनी बख्शी, आरएस चीमा और राजें सच्चर जैसे वकीलों ने बिना पैसे के केस लड़ा है. बताया जाता रहा है कि तमाम दबावों के बाद भी इन वकीलों ने साध्वियों का ही साथ दिया. इन पांचों वकीलों ने समय-समय पर बहादुर बेटियों को कानून की लड़ाई में संयम बनाए रखने के लिए प्रेरित किया.

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