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सोमवार को छिन सकती है योगी की कुर्सी अगर सुप्रीम कोर्ट ने इस अपराध के मामले में उनके ख़िलाफ़ फ़ैसला दिया

देश

साल 2007 में मुख्यमंत्री योदी आदित्यनाथ समेत कई बीजेपी नेताओं पर सांप्रदायिक दंगे फैलाने के आरोप में केस दर्ज किया गया था.

शुक्रवार को बिहार में बीजेपी के समर्थन से नीतीश सरकार ने सदन में विश्वास मत पेश कर सरकार बनाने में सफल हो गयी. इधर नीतीश विश्वास मत पेश कर ही रहे थे उधर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ की कुर्सी चली गयी. दरअसल नवाज़ शरीफ भ्रष्टाचार का आरोप था जिसपर शुक्रवार को पकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया. फैलसा नवाज़ शरीफ के विपक्ष में आया जिससे उन्हें अपने पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा. इसी तरह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भी कुर्सी छीनी जा सकती है. योगी आदित्यनाथ का भविष्य अब सोमवार को तय होगा.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने से पहले योगी आदित्यनाथ को एक हिंदुत्व कट्टर छवि वाला नेता माने जाते थे . वैसे मुख्यमंत्री की छवि अभी भी कट्टर हिंदुत्व वाली ही है लेकिन सरकार में रहते हुए योगी ने सबको साथ लेकर चलने की बात कही है. योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से कई सालों से सांसद है. सांसद रहने के दौरान साल 2007 गोरखपुर में दंगे हुए थे. जिसका आरोप मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर लगा. आरोपों की जांच भी की गयी.राज्य की सरकार ने योगी की कड़ी जांच करवाई थी.

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दरअसल उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ गोरखपुर से सांसद है. 2007 में गोरखपुर में हुए सांप्रदायिक दंगे के मामले में योगी आदित्यनाथ के खिलाफ एक याचिका दी गयी है. जिसमें सीबीआई जांच की मांग की गयी है.इसी मामले में उत्तर प्रदेश के मुख्मंत्री योगी आदित्य नाथ मुख्य आरोपियों में से एक हैं. इसी मामले में शुक्रवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. योगी के खिलाफ कोर्ट में डाली गयी याचिका पर कोर्ट सोमवार को भी सुनवाई करेगा.

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शुक्रवार को सरकार का पक्ष रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अजय मिश्रा ने बहस की. सरकार की ओर से कहा गया कि इस याचिका में कोई दम नही है अभियोजन स्वीकृति नही देने को चुनौती देने वाली याचिका में भी कोई दम नही है. सरकार का कहना है कि मुकदमा 2008 में हुआ. याचिका में शुरुवात में जांच बदलने और सुरक्षा आदि की जांच की मांग की थी.याचिका में अब संशोधन किये बिना सुनवाई नही हो सकती.कोर्ट ने सोमवार मतलब 31 मई को सुनवाई जारी रखने का निर्देश दिया है.

साल 2007 में मुख्यमंत्री योदी आदित्यनाथ समेत कई बीजेपी नेताओं पर सांप्रदायिक दंगे फैलाने के आरोप में केस दर्ज किया गया था. मामली की जाँच सीबीसीआईडी भी कर चुकी है.सीएम पर मुकदमा चलाने के लिए अभियोजन की स्वीकृति जरुरी है. इसी साल मार्च में मुख्यमंत्री का पद संभालने वाले योगी आदित्यनाथ 5 बार गोरखपुर से सांसद है. योगी को उस एफआईआर में गोरखपुर की तत्कालीन मेयर रहीं अंजु चौधरी और स्थानीय विधायक रहे राधा मोहन दास अग्रवाल को साथ नामजद किया गया था।

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