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मोदी के एक तीर से 6 शिकार।कोविंद के राष्ट्रपति बनने से बनेंगे ये काम।धारा 370 तो आपको पता है और जानिए 

देश

कुछ समय पहले तक जिनका नाम कहीं भी चर्चा में नहीं था वो शख्स अब देश का अगला राष्ट्रपति होने जा रहा है. पिछले कुछ समय से अपने फैसलों से सबको हैरत में डाल दे रहे पीएम मोदी की चौंकाने वाली राजनीति जारी है.

सोचना बनता है कि आखिर बिहार में राज्यपाल के पद पर बैठे रामनाथ कोविंद में मोदी और अमित शाह की जोड़ी ने क्या देखा कि उन्हें राष्ट्रपति बनाने का फैसला किया. आपको बता दें कि लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी जैसे पार्टी के दिग्गज नेताओं को दरकिनार कर 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले रामनाथ कोबिंद के रूप में मोदी ने मजबूत चाल चली है. इससे पार्टी को कई फायदे होंगे, आओ समझें निम्न मुख्य 6 फायदों को –

1. बता दें कि कोविंद अनुसूचित जाति कोरी कोली समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं. वहीं पिछले कुछ समय से बीजेपी और संघ दलित वोट में सेंध लगाने की कोशिश कर चुकी है. कोविंद यूपी के कानपुर से है और बिहार के राज्यपाल है. उल्लेखनीय है कि उनके नाम को आगे कर के मोदी ने 2019 के लोकसभा चुनावों के लिए यूपी और बिहार दोनों को ही साधने की कोशिश की है और साथ ही देश भर के दलित समाज को भी संदेश दिया है. 

2. कोविंद का नाम दलित वोट बैंक को साधने की कोशिश में बीजेपी को न सिर्फ वोट दिला सकता है बल्कि उसकी छवि को भी चमका सकता है. वहीं सियासी कमजोरी के दौर से गुजर रही दलित नेता मायावती को और ज्यादा कमजोर कर सकता है. इस कारण भी बीजेपी की ही सियासी सेहत और ज्यादा सुधरती है.

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3. पिछले कुछ चुनावों में बीजेपी क्लीन स्वीप जैसी स्थिति से विपक्ष को खड़ा होने का मौका नहीं दे रही है. हर हार के बाद विपक्ष बद से बदतर स्थिति में पहुँच चूका है. अत: इस चुनाव में भी बीजेपी अपने उम्मीदवार को भारी मतों से जिताना चाहती थी. भारत में इस समय चल रही दलित राजनीति के प्रभाव में बीजेपी ने भी वही चल चली और कोविंद के दलित होने के कारण उनका विरोध करना कुछ विपक्षी दलों के लिए मुमकिम नहीं हो सका.

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4. पिछले लोकसभा चुनावों के दौरान यूपी और बिहार की कुल 120 सीटों में से बीजेपी के नेतृत्व में एनडीए ने 104 सीटें जीती थी. अत: मोदी और अमित शाह अच्छी तरह से जानते हैं कि अगर उन्हें 2019 में फिर से सत्ता में आना है तो उसे यूपी बिहार के प्रदर्शन को दोहराना होगा. और ऐसे में यूपी से राष्ट्रपति बनना एक बड़ा कारक साबित हो सकता है. वहीं कोविंद बिहार के राज्यपाल थे तो बिहार के वोट बैंक पर भी निशाना लगा दिया है.

5. कोविंद के नाम को लेकर चाल चलने से मोदी विपक्ष को बांटना चाहते थे, और हुआ भी. कोविंद यूपी से हैं तो मुलायम और मायावती खुलकर उनका विरोध नहीं कर पाएंगे. राष्ट्रपति बनने से पहले कोविंद बिहार के राज्यपाल थे और कोरी कोली समाज के हैं तो नीतीश कुमार भी उनका विरोध नहीं कर पाए, यहाँ तक बीजेडी को भी समर्थन करना पड़ा. अत: मोदी इस चाल में कामयाब रहे.

6. कोविंद राजनीति से जुड़े रहे व्यक्ति है. वे दो बार राज्यसभा के सांसद रह चुके हैं. प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के काल में उनके निजी सचिव भी रह चुके हैं. राज्यसभा सांसद रहते हुए वह बहुत सी समितियों कमेटियों में अहम पदों पर रह चुके हैं. अत: विपक्ष का एक धड़ा बीजेपी को राजनितिक व्यक्ति चुनने की कह रहा था, बीजेपी ने उनको अपने साथ लेते हुए 2019 की तैयारियों का आगाज बड़े तरीके से कर दिया है

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