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55 साल बाद भारतीय सेना घुसी तिब्बत में। सरकार का सीमा लाँघकर चीनी सड़क तोड़ने का फ़रमान 

देश

चीनी मीडिया ने भारतीय सेना पर नए आरोप लगाए हैं। चीन का कहना है कि भारतीय सेना डोकलाम के नजदीक तिब्बत में घुस गई है। ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि भारतीय सेना चीन अधिशाशित क्षेत्र तिब्बत में घुस आई है। यदि भारत ने सेना पीछे नहीं हटेगी तो गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे।

बता दें कि सिक्किम से सटे चीन की सीमा पर तनाव के बीच भारत ने डोक ला इलाके में सैनिकों की तैनाती बढ़ाई है। 1962 के बाद पहली बार ऐसा हो रहा है, जब किसी इलाके में भारत और चीन की सेनाओं के बीच इतने लंबे वक्त तक गतिरोध बना हुआ है।

एक महीने से डोका ला में दोनों देशों के सैनिक आमने-सामने हैं। डोका ला उस क्षेत्र का भारतीय नाम है, जिसे भूटान डोकलाम कहता है, जबकि चीन इसे अपने डोंगलांग क्षेत्र का हिस्सा मानता है।

सूत्रों के मुताबिक, चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) द्वारा भारतीय सेना के 2 बंकरों को नष्ट करने की आक्रामक गतिविधि के बाद भारत ने ‘गैर-आक्रामक मुद्रा’ में और ज्यादा जवानों को भेजा है।

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ताजा गतिरोध का सामने आया ब्योरा : सूत्रों ने पहली बार दोनों सेनाओं के बीच ताजा गतिरोध का ब्योरा देते हुए बताया कि 1 जून को पीएलए ने भारतीय सेना से डोका ला में 2012 में बने अपने दो बंकरों को हटाने को कहा। डोका ला भारत, भूटान और तिब्बत से लगी चुंबी घाटी के नजदीक है। डोका ला इलाके में भारतीय सेना कई सालों से गश्त करती रही है। सेना ने 2012 में यहां 2 बंकर बनाने का फैसला किया।

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6 जून की रात चीनी बुलडोजरों ने ढहा दिए बंकर : सूत्रों ने बताया कि बंकरों को हटाने को लेकर 1 जून को चीन की सेना की तरफ से दी गई चेतावनी के बाद इसकी सूचना नॉर्थ बंगाल के सुकना में स्थित 33 कोर मुख्यालय को दी गई। 6 जून की रात को चीन के 2 बुलडोजरों ने बंकरों को नष्ट कर दिया। चीन का दावा था कि यह इलाका उसका है और इस पर भारत या भूटान का कोई हक नहीं है।

भारतीय सैनिकों ने अतिक्रमण से रोका : वहां पर मौजूद भारतीय सैनिकों ने चीनी सैनिकों और मशीनों को इलाके में और ज्यादा नुकसान पहुंचाने या अतिक्रमण करने से रोका। 8 जून को करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित नजदीकी ब्रिगेड मुख्यालय से अतिरिक्त बल भी गतिरोध स्थल पर पहुंच गए।

इस दौरान दोनों देशों के सैनिकों के बीच झड़प भी हुई और इसमें दोनों पक्षों को मामूली चोटें भी आईं। इलाके में स्थित पीएलए की 141 डिविजन से और ज्यादा जवान मौके पर पहुंच गए, जिसके बाद भारतीय सेना ने भी अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए और ज्यादा जवानों को मौके पर बुलाया।

2013 में लद्दाख डिविजन में 21 दिनों तक बना रहा गतिरोध : 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद पहली बार इस इलाके में भारत और चीन के सैनिकों के बीच इतने लंबे समय तक गतिरोध बना हुआ है। इससे पहले 2013 में जम्मू-कश्मीर के लद्दाख डिविजन स्थित दौलत बेग ओल्डी में दोनों देशों की सेनाएं करीब 21 दिनों तक आमने-सामने थी। उस समय चीन के सैनिक भारतीय सीमा में 30 किलोमीटर भीतर तक आ चुके थे। इलाके पर अपना दावा जताया था। हालांकि बाद में भारतीय सेना ने उन्हें वापस खदेड़ा।

सिक्किम में निर्धारित है सीमा : मई 1976 को भारत का हिस्सा बना सिक्किम इकलौता ऐसा राज्य है, जहां चीन के साथ सीमा निर्धारित है। सिक्किम की चीन से सटी सीमा का निर्धारण 1898 में चीन के साथ हुए एक समझौते पर आधारित है। 1962 में भारत-चीन युद्ध के बाद भारतीय सेना जहां बनी रही, वहां आईटीबीपी सीमा की रक्षा करती है और अंतरराष्ट्रीय सीमा से 15 किलोमीटर उसका शिविर है। दोनों देश के सैनिकों के बीच झड़प के बाद भारतीय सेना ने मेजर जनरल रैंक के एक अधिकारी को भेजा,

जिसने चीन के साथ फ्लैग मीटिंग की मांग की। लेकिन चीन ने दो बार भारत के इस आग्रह को ठुकरा दिया। तीसरी बार में बैठक आग्रह स्वीकार किया और भारतीय सेना से डोका ला के लालटेन क्षेत्र से वापस जाने को कहा। इस गतिरोध के कारण चीन ने कैलाश मानसरोवर के लिए 47 तीर्थयात्रियों के पहले जत्थे को तिब्बत में प्रवेश करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। सूत्रों के मुताबिक चीन ने भारत यह भी सूचित किया कि 50 यात्रियों के अन्य जत्थे का वीसा भी रद कर दिया गया है।

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