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नाम नैंसी,उम्र 11-बलात्कार,हाथ गला रेता फिर तड़पाकर तेज़ाब से नहलाया।नीतीश बाबू क्या क़सूर है बिहार में बच्चियों का? बिहार में बहार है….

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मैं उस उम्र में हूं जिसमें एक औरत को दर्द सहने की क्षमता आ जाती है. जिस उम्र में उसे ये मालूम होता है कि अगर चीखकर रोना है तो मुंह में कपड़ा ठूंसकर रोना बेहतर होगा वरना लोग जाग जाएंगे. फिर भी एक दिन खाना बनाते हुए गर्म तवा छू जाता है और मुंह से जोर की चीख निकलती है. ऊपरी खाल पर एक हल्का भूरा दाग पड़ जाता है जो शायद 3 दिनों में चला जाएगा. लेकिन वो दर्द भी ऐसा होता है कि जली हुई खाल पर कुछ छू जाए, तो जोर से लगता है.

आप भी कभी जले होंगे. तवे से, रोटी की भाप से, मोमबत्ती से, सिगरेट के लाइटर से. वो एक सेकंड का दर्द याद करिए और उसे हजार गुना कर लीजिए. शायद पूरे शरीर पर तेज़ाब डालने पर हजार गुना लगता होगा. शायद उससे भी ज्यादा. मेरी कल्पना वहां तक जा नहीं पाती.12 साल की नैंसी झा को तेज़ाब से जलाया गया. लेकिन उसके पहले उसका गला रेता गया, कलाइयों की नस काटी गई. उस बच्ची पर क्या बीती, मेरी कल्पना के परे है. उसके मां-बाप इस वक़्त किस हाल में हैं, ये सोचना नामुमकिन है. मुझे मां की शक्ल याद आती है जिसका कलेजा मेरे शरीर पर एक खरोंच लगने भर से मुंह को आ जाता था. इस बच्ची की तस्वीर देखकर रीढ़ की हड्डी में सिहरन होती है. लगता है कलेजे के बीचोंबीच किसी नरभक्षी ने अपने दांत गड़ा दिए हैं.

ये कल्पना मात्र है. उस बच्ची के ऊपर असल नरभक्षी चढ़े हुए थे. गोश्त के जैसे उसका सेवन किया है.मधुबनी बिहार का एक शहर है. छोटा नहीं, मगर बड़ा भी नहीं. बस उतना ही बड़ा है कि कुछ सुंदर चित्रकारियों और अपनी लड़कियों से सपनों को पाल सके. नैंसी जैसी लड़कियों के सपने, उसकी बुआ जैसी लड़कियों के सपने.

जिन दो लड़कों ने नैंसी को मारा, उनको गिरफ्तार किया गया है. नैंसी की बुआ की शादी होने वाली थी. ये लड़के नहीं चाहते थे कि शादी हो. इसलिए शादी के ठीक एक दिन पहले, जब नैंसी महंदी की रस्म के लिए स्कूल ने घर ई ओर लौट रही थी, दो लड़के बाइक पर आए और नैंसी को उठा ले गए. 25 मई के दिन नैंसी का अपहरण हुआ था.

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नैंसी के पिता ने FIR दर्ज करवाई मगर पुलिस ने कोई एक्शन नहीं लिया. शायद वो किसी नेता या स्टार की बेटी नहीं थी, उसके पिता के पास किसी अधिकारी या नेता का नंबर नहीं था, इसलिए उसकी जान की कीमत कम थी. बच्चियों का अपहरण होना, उनके साथ अखबारी भाषा में ‘दुष्कर्म’ होना इतना आम है, कि अखबारों में 29 तारीख के पहले खबर नहीं दिखी. कम से कम देश के बड़े हिंदी अखबारों में तो नहीं दिखी. कुल चार दिन बाद एक छोटे से कॉलम में नैंसी को जगह मिली, जिसमें बताया गया था कि बच्ची की मौत से घर में मातम छाया हुआ है.

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तिलयुगा नदी के किनारे जिस हालत में बच्ची का शव मिला है, देखकर आंखें अपने आप ही डर से मिच जाती हैं.अखबारों के मुताबिक़ बच्ची का पोस्टमॉर्टेम हो चुका है. लेकिन ये सामने नहीं आया है कि उसका रेप हुआ है या नहीं. हालांकि बच्ची के पक्ष में बोलने वाले और कुछ स्थानीय वेबसाइट्स का ये कहना है कि पहले बच्ची का रेप किया गया है.

घर में इतनी नन्ही सी लड़की की इतनी वीभत्स मौत हुई है. जैसा पवन झा और लालू झा नाम के आरोपी चाहते थे, नैंसी की बुआ की शादी रुक गई है. लेकिन नैंसी जिन हाथों में महंदी लगवाने घर की ओर उत्सुकता से जा रही थी, उन्हें रेत दिया गया है. क्या महज बच्ची को मृत देखना ही मां-बाप के लिए काफी न होता, कि उसका शरीर जला भी डाला है?

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