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पूरी होती भविष्यवाणी”रूस अपनायेगा हिन्दू धर्म,एक हिन्दू एशिया को एक कर देगा”जानिए क्या हुआ रूस में

देश

नास्त्रेदमस (Nostradamus) फ्रांस के एक प्रक्षात भविष्यवक्ता थे। १४ दिसंबर १५०३ को फ्रांस नास्त्रेदमस क जन्म फ्रांस में हुआ था। उन्होंने राजनीतिक, धार्मिक, प्राकृतिक, आदी आदी घटनाओं संबंधी कई भविष्यवाणीयां की है और उनकी बहुत सी भविष्यवाणीयों का सच होने का दावा भी किया जाता है। १६वीं सदी के भविष्यवक्ता नास्त्रेदमस ( Nostradamus ) की भविष्यवाणियां बीसवीं शताब्दी के जन साधारणों के बीच बेहद लोकप्रिय हो गईं हैं।ashokas-chakra-in-stone

नास्त्रेदमस ( Nostradamus ) की भविष्यवाणीयां पूरी दुनिया में प्रचलित है ।कहा जाता है की पिछले ४०० सालों में उनकि ८०० भविष्यवाणियां सच साबित हुई है । नास्त्रेदमस ( Nostradamus ) की भविष्यवाणीयां पूरी दुनिया में प्रचलित है । चाहे वो १९४२ में अंग्रेजों के साम्राज्य का दमन होना हो या और कुछ। नास्त्रेदमस ये भी कहा था की नाज़ी, यहूदियों पर नकेल कसने का प्रयास करेंगे और ये घटना घटित भी हो चुकी है.

नास्त्रेदमस ( Nostradamus ) के भविष्यवाणियों मैं भारत को लेकर भी कई भविष्यवाणी थी , उन्होने कहा था की भारत एक सुनहरे भविष्य वाला देश है , भारत का भविष्य बेहद उज्ज्वल है औरहिन्दू धर्म पूरे एशिया महाद्वीप मैं और कई अरब देशों में भी छा जायेगा।
पहली भविष्यवाणी .

पहली भविष्यवाणी : ‘तीन ओर घिरे समुद्र क्षेत्र में वह जन्म लेगा, जो बृहस्पतिवार को अपना अवकाश दिवस घोषित करेगा। उसकी प्रसंशा और प्रसिद्धि, सत्ता और शक्ति बढ़ती जाएगी और भूमि व समुद्र में उस जैसा शक्तिशाली कोई न होगा।’

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“भारत में वह होगा जो दुनिया में नहीं होगा। एक गरीब घर में पैदा होगा दुनिया का मुक्तिदाता और पहले सब लोग उससे नफरत करेंगे लेकिन बाद में सभी उससे प्यार करेंगे।” सोचने वालि बात ये है कि क्या ये नरेंद्र मोदी की और इशारा कर रहा है? वैसे ज्यादातर जानकार ये मानते हैं की दुनिया का ‘मुक्तिदाता’ भारत में ही जन्म लेगा।
एक नेता जो कि भारत के दक्षिणी भाग से होगा

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नास्त्रेदमस ( Nostradamus ) ने ये भी भविष्यवाणी की थी कि एक नेता जो कि भारत के दक्षिणी भाग से होगा वह पूरे एशिया महाद्वीप को एक कर देगा ।मगर उन की भविष्यवाणी मैं सब से ज्यादा चौकाने वाली भविष्यवाणी ये है जिसमें उन्होने कहा था कि रूस साम्यवाद त्यागकर हिन्दू धर्म अपना लेगा ।

भारत कि सेना अपनी पुरानी गलतियों को सुधारते हुए अरब देशों में अपना परचम लहराएगी और रूस भी उस मैं साथ देगा।

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