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शिवलिंग की शक्तिः खुदाई में निकले शिवलिंग को अंग्रेजों ने किया खंडित! तुरंत हो गई मौत! 

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रांची/नई दिल्ली – हिंदू धर्म में भगवान की मूर्ती और उनके चिह्नों की पूजने की परंपरा है। आमतौर पर ऐसी भगवान की प्रतिमा या ऐसे चिह्नों को नहीं पूजा जाता जो खंडित हो। परंतु झारखंड में एक मंदिर ऐसा भी है जहां खंडित शिवलिंग का पूजन वर्षों से हो किया जा रहा है।

इस शिवलिंग का दर्शन यहां अत्यंत शुभ माना जाता है। यह मंदिर झारखंड के गोइलकेरा में स्थित है जहां महादेवशाल धाम में साक्षात शंकर भगवान विराजमान हैं। करीब 150 वर्षों से इस मंदिर में खंडित शिवलिंग की पूजा कि जा रही है।Mahadevshala dham broken shivlinga.

इस शिवलिंग के खंडित होने की भी एक कहानी है। इस शिवलिंग को खंडित करने का दुस्साहस एक ब्रिटिश इंजीनियर ने किया था जिसके परिणाम स्वरुप उसका मौत हो गई। लोगों के अनुसार ब्रिटिश शासन के समय जब रेलवे लाइन बिछाने का काम चल रहा था, और गोइलकेरा के बड़ैला गांव के नजदीक खुदाई हो रही थी। उसी दौरान खुदाई में एक शिवलिंग निकला जिसको देखकर मजदूरों ने खुदाई रोक दी।

इस काम को कराने वाले वहां मौजूद ब्रिटिश इंजीनियर रॉबर्ट हेनरी ने कहा कि ये सब अंधविश्वास है और उसने फावड़े से शिवलिंग पर मार दिया जिससे शिवलिंग खंडित हो गया। लेकिन आश्चर्य कि बात है कि शाम को घर लौटते समय रास्ते में ही उस ब्रिटिश इंजीनियर रॉबर्ट हेनरी इंजीनियर की मौत हो गई।

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हेनरी कि मौत से अंग्रेज इतना डर गए कि उन्होंने रेल की पटरियों का मार्ग दूसरी और से कर दिया। हेनरी के प्रहार से शिवलिंग दो टुकड़ों मे टूट गया तभी से खंडित हुए शिवलिंग के दोनों टुकड़ों की पूजा होती है। खुदाई के वक्त जहां शिवलिंग निकला था, वहां देवशाल धाम है। खंडित शिवलिंग यहीं पर एक मंदिर में स्थापित किया गया है। जबकि दूसरे टुकड़े करीब दो किमी की दूरी पर रतनबुर पहाड़ी पर मां पाउडी के दरबार में स्थापित किया गया है।

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