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Social Media पर वायरल हो रहा सेना के जवान का कन्हैया के नाम खत! पढ़िए क्या कहा इस जवान ने!

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इन्डियन आर्मी के जवान का कन्हैया को लेटर … पढें ..सुनो.. हाँ तुम्ही से बात कर रहा हूँ..मैं नही जानता तुम क्या सोचते हो मेरे बारे में, और वाकई जानना चाहता भी नहीं। लेकिन समय बार बार कुरेदकर मेरी उलझनों की जड़ टोह रहा था तो आज मन में भरा दर्द पिघलकर बहना चाहता है.. तुम तक.. हाँ तुम में से हर एक तक जो मुझसे जुड़ा हुआ है। और जुड़ाव तो मुझे सारे हिन्दुस्तान से है।

मेरे जीवन की सबसे बड़ी समस्या मेरा भावुक होना है, हो सकता है ये तुम्हे एक ड्रामा लगे.. लेकिन जय माँ भवानी और भारत माँ के जयघोष के साथ उपजी भावनाएं मुझे अँधा कर देती हैं और मुझे काल की प्रतीक दुश्मन की गोलियों से भी दो दो हाँथ करने का जी करता है। तेज बहते पानी की धार से लड़ते जब तुम में से किसी एक को देखता हूँ तो खुद को भूल जाता हूँ और कूद पड़ता हूँ उस समय बंधुत्व की तीव्र भावनाएं कहाँ से आती हैं नही जानता मैं।

तुम जब हिन्दुस्तान की बर्बादी का स्वप्न पुरे हक के साथ देख रहे होते हो तो मैं रो पड़ता हूँ फिर तुम्हारे वो तर्क जिन्हें सुनकर आँखों में खून उतर आता है जिसे बेबसी की आंच पर पिघलाकर बहा देता हूँ असहाय सा। … लेकिन तुम्हे कोई फर्क पड़ता है ?? शायद नही, तुम्हारी एक हरकत से विक्षिप्त सा हो गया हूँ.. किसे अपना दर्द सुनाऊँ, मैं गंवार तुम प्रबुद्धजनों के सामने फीका पड़ जाता हूँ हर बार।

समंदर की लहरों में फंसा या बर्फ के नीचे दबा जब मैं आखिरी सांस ले रहा होता हूँ तब भी मुझे तुम्हारी याद ही आती है.. सोचता हूँ कि कैसा बनाओगे तुम मेरे हिन्दुस्तान को.. किस ओर ले जाओगे। मेरे लहू के गारे से बनी बुनियाद पर हिन्दुस्तान की कैसी इमारत खड़ी करोगे और तिरंगे को ऊँचा फहराने के लिए किन शिखरों का चयन करोगे।

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जानते हो हथियार हमारे साथी हैं हमारे मौन साथी, जब हम दोनों मिलकर शत्रुओं का शिकार कर रहे होते हैं तो भय होता है हमे भी मृत्यु का.. लेकिन तुम्हारी मुस्कान हमारे जेहन में उतरती चली जाती है जो निकाल फेंकती है हमारी हर शंका हमारे हर भय को। तुम्हारी हरकते कभी कभी बहुत दुःख देती हैं, तुम्हे आजाद भारत में आजादी की बात करनी रहती है तुम्हे जरा जरा सी बात पर आतंकियों को शहीद बनाना रहता है.. तुम यहाँ पर अपनी योग्यता साबित करने का प्रयास करते हो, और जानते हो तुम्हारे इन तथाकथित शहीदों की शहादत में मेरा भी योगदान था.. फिर तुम्हारे तर्कों के आधार पर मैं राष्ट्रद्रोही हो गया।
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और तो और तुमने तो हमें बर्बर और बलात्कारी तक घोषित कर दिया, अरे शर्म करो यार।
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मैं कोई एहसान नही कर रहा तुम पर न तुम मुझ पर बस मेरा तुमसे भावनात्मक जुड़ाव खत्म ही नही हो पाता न जाने क्यों, उलझ गया हूँ इस भ्रम जाल में। तुमसे थोडा संवाद बनाने का प्रयास करूँ तो तुम किसी जाहिल फौजी से क्यों बात करोगे।
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रेलवे स्टेशन पर मेरे पास अपना सामान सुरक्षित छोड़ जाने वाले तुमने हर बार मेरे साथ विश्वासघात किया और तुम्हारे प्रपंच का शिकार हुआ.. फिर भी प्रेम कम नही हुआ तुमसे। कभी कभी तुमसे एक आत्मीय रिश्ता जुड़ गया और मैंने हर बार तुम्हारी ख़ुशी चाही अपनी आँखों में तुम्हारी कामयाबी के स्वप्न देखे, तुम्हे सुना, तुम्हे समझा हर बार लेकिन तुम मुझे समझ ही नहीं पाये तुमने हर बार मेरे समर्पण को अपना अधिकार और मेरे भावनात्मक लगाव को एक ढोंग समझा.. और मैं बावरा फिर भी जिए जा रहा हूँ तुम्हारे लिए क्यों.. भावुक जो हूँ।
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आज तुमने मुझे राष्ट्रदोही बना दिया गुस्सा आया है लेकिन कल तुम हममे से किसी की लाश पर सियासत करोगे या अपनी वैचारिक पुष्टता परखने के लिए तर्क करोगे या फिर उसमे भी अपना स्वार्थ साधोगे तो भी मैं मुस्कराउंगा तुम्हारी बेवकूफी पर क्योंकि हमने तो कर लिया और हम ही करेंगे भी बाकी तुम किसी का स्नेह पाने के लायक नही.. हाँ तुम भी।
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