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ये बदला 3 साल में:ब्रिटेन ने POK के प्रांतों को बताया भारत का हिस्सा।पाक को गिलगित बलतिस्तान ख़ाली करने की सलाह 

देश

ब्रिटेन की संसद ने गिलगित-बाल्टिस्तान को भारत का संवैधानिक हिस्सा बताते हुए पाकिस्तान द्वारा इसे अलग प्रांत घोषित करने के प्रस्ताव की निंदा की है। ब्रिटिश संसद ने इस संबंध में एक बिल पास किया है। प्रस्ताव में कहा गया है कि यह हिस्सा जम्मू-कश्मीर का अंग है और पाकिस्तान ने 1947 से इसपर गैरकानूनी तौर पर कब्जा कर रखा है। मालूम हो कि भारत 1947 में हुए बंटवारे के ऐतिहासिक और भूगोलीय आधारों पर इस भूभाग को अपना बताता आया है। ब्रिटिश संसद द्वारा पास किया गया यह प्रस्ताव भारतीय पक्ष की दृष्टि से काफी सकारात्मक है। ऐसा इसलिए भी है कि विभाजन से पहले इस पूरे क्षेत्र पर ब्रिटेन का अधिकार था। ब्रिटिश राज्य की सीमाओं के मुताबिक ही भारत और पाकिस्तान के विभाजन की शर्तें तय की गई थीं। बता दें कि बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा, पंजाब और सिंध पाकिस्तान के चार प्रांत हैं।

ब्रिटिश संसद का यह प्रस्ताव भारत के लिए बड़ी सफलता
कंजरवेटिव पार्टी नेता बॉब ब्लैकमैन द्वारा लाया गया यह प्रस्ताव 23 मार्च को ब्रिटिश संसद पेश किया गया था। प्रस्ताव में कहा गया है कि पाकिस्तान द्वारा इस तरह की घोषणा किए जाने से इस विवादित क्षेत्र में तनाव और बढ़ेगा। बता दें कि रणनीतिक रूप से अहम माने जाने वाले विवादित गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र को पाकिस्तान अपना पांचवां प्रांत घोषित करने की योजना बना रहा है। माना जा रहा है कि पाकिस्तान यह कदम चीन की चिंताओं को देखते हुए उठा रहा है, चूंकि यह इलाका पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से सटा हुआ है। ऐसे में भारत के लिए पाकिस्तान का यह कदम चिंता की वजह बन सकता है।

बिल ने गिलगित-बाल्टिस्तान को भारत का कानूनी-संवैधानिक हिस्सा बताया-इस संबंध में ब्रिटिश संसद में पेश हुए प्रस्ताव में कहा गया है, ‘गिलगित-बाल्टिस्तान कानूनी और संवैधानिक रूप से भारत के जम्मू-कश्मीर का हिस्सा है।1947 से ही इसपर पाकिस्तान ने गैरकानूनी कब्जा कर रखा है। इस इलाके के लोगों को मूलभूत सुविधाएं तक मुहैया नहीं हैं, यहां तक कि उन्हें अभिव्यक्ति की आजादी तक नहीं मिलती है।’ प्रस्ताव में आगे लिखा है कि इस इलाके के जनसंख्या वितरण में किसी भी तरह का बदलाव करना इस विवादित क्षेत्र में तनाव भड़काने जैसा होगा। बता दें कि बलूचिस्तान के राजनीतिक और मानवाधिकार कार्यकर्ता इस इलाके में मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों की संयुक्त राष्ट्र से जांच करवाने की मांग करते रहे हैं। पाकिस्तान द्वारा गिलगित-बाल्टिस्तान को अपना पांचवां प्रांत बनाने की योजना पर प्रतिक्रिया करते हुए बलूच नेताओं ने इसके गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है।

चीन को फायदा पहुंचाने के लिए पाकिस्तान ने बनाई यह योजना!-पाकिस्तान के अंतर-प्रांतीय समन्वय मंत्री रियाज हुसैन पीरजादा ने कहा था कि विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज की अगुवाई वाली एक समिति ने गिलगित-बाल्टिस्तान को प्रांत का दर्जा देने का प्रस्ताव रखा है। पीरजादा ने कहा, ‘समिति ने अपनी सिफारिशों में कहा है कि गिलगित-बाल्टिस्तान को पाकिस्तान का एक अलग प्रांत बनाया जाना चाहिए।’ उन्होंने यह भी कहा था कि उस क्षेत्र का दर्जा बदलने के लिए संविधान में संशोधन करना होगा। बता दें कि 46 अरब डॉलर की लागत से बनने वाला चीन-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) इसी इलाके से होकर गुजरेगा। इस प्रॉजेक्ट पर भारत कई बार आपत्ति जता चुका है। भारत का मानना है कि पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) से गुजरने के चलते यह प्रॉजेक्ट भारत की संप्रभुता का उल्लंघन है। हालांकि चीन और पाकिस्तान ने भारत की आपत्ति को तवज्जो नहीं दी है।

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PoK में हो रहा है इस फैसले का जबर्दस्त विरोध
पाकिस्तान द्वारा गिलगित-बाल्टिस्तान को अलग प्रांत बनाने की योजना से जुड़ी खबरें सामने आने के बाद से ही PoK में इसके खिलाफ जबर्दस्त माहौल बना हुआ है। यहां के वकील इसका विरोध करते हुए हड़ताल पर चले गए थे। बड़ी संख्या में आम लोग भी गिलगित-बाल्टिस्तान को जम्मू-कश्मीर से अलग करने की योजना का विरोध कर रहे हैं। लोगों का आरोप है कि पाकिस्तान अक्साई चिन इलाके की तरह यह हिस्सा भी चीन के सुपुर्द कर देगा। पाकिस्तान पर यह आरोप भी लग रहा है कि चीन को फायदा पहुंचाने के लिए यह कदम उठा रहा है। भारत ने भी इस योजना पर तीखी आपत्ति जताई है।

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