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केजरीवाल की मानसिक हालत देख दुःख होता है,उसके बकवास पत्र बिना पढ़े मेरे कूड़ेदान में जाते थे।Video ने मचाया तहलका

सवाल है की हम सब केजरीवाल को कैसे जानते हैं। मैं बताता हूँ, केजरीवाल भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम में अन्ना हज़ारे जैसे मेहनती देशभक्त के कंधों पर चढ़कर पहले से सड़ चुकी भारतीय राजनीति को ओर गंदा करने के लिए भारतीय राजनीति में आए।

आज ख़ुद मुझे और मेरे जैसे लाखों लोगों को दुःख होता है की हमने अपने सब काम छोड़कर जिस मुहिम को आगे बढ़ाया था उसे एक ठग ने इस क़दर पैसे और सत्ता के लिए बेच दिया। आए दिन देश के प्रधानमंत्री का अपमान करना जिससे पूरा देश विदेशीयों की नज़र में मज़ाक़ का पात्र बनता है, बिना सबूत पहले आरोप लगाकर मीडिया में सनसनी पैदा करना फिर चोरी छुपे माफ़ी माँग लेना आदत बन गई है केजरीवाल की।

जी हाँ सोशल मीडिया पर दिल्ली के पूर्व एलजी नजीब जंग का टाइम्ज़ नाउ को दिया गया एक साक्षात्कार वाइरल हो रहा है जिसने केजरीवाल को हँसी का पात्र बना कर रख दिया है। इसमें पूर्व एलजी ने कहा है कि केजरीवाल की मानसिक स्थिति पर दुःख होता है। उन्होंने कहा केजरीवाल हमेशा बोलते हैं की दिल्ली मेरे पास 67 विधायक हैं और मुझे सर्वशक्तिमान होना चाहिए, आपके माध्यम से मैं बताना चाहता हूँ की दिल्ली के 67 विधायकों के अलावा भी 8 सांसद जिनका अधिकार क्षेत्र और ताक़त और जिम्मेदारियाँ केजरीवाल के सभी विधायकों से कहीं ज़्यादा है इसके अलावा तीन मेअर और नागलपलिकाएँ हैं जो केजरीवाल के अधिकार में हैं ही नहीं पर अच्छा काम कर रहे हैं। केजरीवाल के पस जो अधिकार हैं वो इनमें कुछ करके दिखाएँ ना की दूसरो के काम में हस्त्त्क्शेप करें।

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आगे पूछे जाने पर की केजरीवाल जब आपको कहते हैं की आप मोदी के चमचे हो तो उस पर आप जवाब क्यूँ नहीं देते तो जंग बोले ऐसे जहिल सवालों का जवाब देने का तुक ही नहीं बनता। मैं जवाब क्यूँ दूँ? केजरीवाल की मानसिक स्थिति पर मुझे बेहद दुःख है। उनके ऐसे पत्र केवल और केवल मेरे कूड़ेदान की शोभा बढ़ते हैं। ऐसे किसी भी ख़त के आते ही बिना पढ़े मैं उन्हें कूदे में फ़िकवा देता हूँ जवाब देने का तो सवाल हि नहीं उठता।

उन्होंने आगे कहा की एक मुख्यमंत्री का प्रधानमंत्री को या एलजी को या किसी भी सरकारी तंत्र के व्यक्ति को लिखी चिट्ठी संजो कर रखने वाला पवित्र दस्त्वेज होती है जो भविष्य की पीढ़ियों के लिए उदाहरण होती है परंतु इस तरह के पत्र पढ़कर मुझे ग्लानि का अनुभव ज़्यादा होता है।

देखें विडीओ:

वैसे देखा जाए तो आज ज़्यादातर दिल्लीवालों को भी अपने उस फ़ैसले पर ग्लानि ही अनुभव होती होगी जिसने हमें सब जगह मज़ाक़ बनवा दिय और दिल्ली को कूड़े का ढेर।

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