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मोदी के केवल इशारे भर के बाद हिल गया पाक, PoK के गिलगित और बालटिस्तान में जबरदस्त विद्रोह

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नई दिल्ली/जम्मू : कल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि पीओके यानी पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर भी हमारा है. आज वहां से तस्वीरें आई हैं कि पाकिस्तान के खिलाफ वहां रह रहे लोग गुस्से में हैं. पाकिस्तान के खिलाफ लोगों ने नारे लगाये हैं. बीते कई दिनों से वहां हंगामा चल रहा है. 

लोगों ने प्रदर्शन कर पाकिस्तान के खिलाफ नारे लगाये

गिलगिट, जहां लोगों ने प्रदर्शन कर पाकिस्तान के खिलाफ नारे लगाये हैं. कल मुजफ्फरबाद से भी तस्वीरें आई थी. वहां भी नारे लगे थे. लोगों का ताजा गुस्सा पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की उस कार्रवाई के बाद फूटा है जिसमें उन्होंने 500 से ज्यादा युवकों को हिरासत में ले लिया था.

लोगों का कहना था कि जिन युवकों को सुरक्षा बलों ने कैद किया है वे राजनीतिक हकों की बात कर रहे थे. इसके साथ ही उन्होंने पाकिस्तानी बलों के खिलाफ नारे लगाए थे. यह विरोध प्रदर्शन उस क्षेत्र में हो रहा है जहां शिया लोग ज्यादा है जबकि पाकिस्तान में सुन्नी लोगों की संख्या ज्यादा है.


चाइना-पाक इकोनॉमिक कॉरीडोर पर भी नाराज लोग

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के गिलगित-बालिस्तान में लोगों के बीच पाकिस्तान और चीन के हस्तक्षेप को लेकर गुस्सा बढ़ रहा है। इन दोनों देशों द्वारा अपने फायदे के लिए यहां के संसाधनों का मनमाना दोहन करने को लेकर स्थानीय लोगों में रोष है।






स्थानीय लोग 3000 किमी लंबे चीन-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) का भी व्यापक विरोध कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि उन्हें इसका कोई फायदा नहीं मिलने जा रहा है।

चीन इस प्रॉजेक्ट के लिए 40 बिलियन डॉलर का निवेश कर रहा है। इससे पश्चिमी चीन और दक्षिणी पाकिस्तान आपस में रोड नेटवर्क, रेलवे लाइन और पाइपलाइंस के जरिए जुड़ जाएंगे। कहा जा रहा है कि इससे क्षेत्र का सामाजिक-आर्थिक विकास होगा, पर स्थानीय लोगों की नाराजगी इस बात को लेकर है कि इस बारे में सभी हितधारकों से संपर्क नहीं किया गया।


स्थानीय निवासी अब्दुल रहमान बुखारी का कहना है, ‘लोग इस बात को लेकर नाराज हैं कि कम से कम उन्हें इस बारे में बताना चाहिए था, भरोसे में लेना चाहिए था। अगर हम सिर्फ चीन से आने वाले ट्रक गिनते रहेंगे तो इससे तो कोई फायदा नहीं होगा।’


कश्मीर नैशनल पार्टी के नेता मोहम्मद नईम खान ने कहा, ‘वे CPEC प्रॉजेक्ट में 60 इकनॉमिक जोन बना रहे हैं, लेकिन इनमें से कोई भी गिलगित-बालिस्तान या पीओके में नहीं है। यहां पर कोई निवेश नहीं हो रहा है।’ यह आम धारणा है कि चीन अपने फायदे के लिए यहां पर डैम, हाइवे और पोर्ट बना रहा है।


गिलगित-बालिस्तान नैशनल कांग्रेस के डायरेक्टर एस.एच. सेरिंग का कहना है, ‘जब पाक सेना चीन से लगा हुआ कराकोरम हाइवे बना रही थी, प्रभावित लोगों को कोई मुआवजा नहीं दिया गया। अब जबरन CPEC बनाया जा रहा है। लोगों की मर्जी के बिना गिलगित-बालिस्तान की सरकार और पाक सेना उनकी पुश्तैनी जमीन ले रही है।’


इस प्रॉजेक्ट को कानूनी सुरक्षा देने के लिए पाकिस्तान सरकार गिलगित-पाकिस्तान को संवैधानिक दर्जा देने की कोशिश कर रही है, हालांकि स्थानीय लोग इसके विरोध में हैं। पाकिस्तान ने गिलगित-पाकिस्तान में 1947 में गैरकानूनी ढंग से कब्जा कर लिया था। तब से इस इलाके में स्थानीय लोग आम सुविधाओं के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं।

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