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मोदीनीति:भारत की दी ब्रह्महोस के दम पर वियतनाम ने चीन को दी युद्ध की चुनौती, सफल कूटनीति का एक और उदाहरण

दुनिया देश मोदी

हालही में अपनी विएतनाम यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने विएतनाम को ब्रह्मोस मिसाइल देने के समझौते पर हस्ताक्षर किये थे जिसके परिणामस्वरूप विएतनाम ने चीन को खुली टक्कर देने का मन बना लिया है। मोदी की यात्रा के दौरान चीन ने भारत के उसके विरोधी राष्ट्रों को हथियार देने पर विरोध जताया था जिसके बावजूद भारत ने ना सिर्फ चीन के विरोधी राष्ट्रों से मुलाकात की बल्कि उन्हें हथियार भी प्रदान किये।

मोदी के वियतनाम को दुनिया की सबसे घातक स्वदेस निर्मित मिसाइल देने को भारत की दूरगामी कूटनीति के तौर पर देखा जा रहा था जो अब दुनिया के सामने आ रही है। भारत ने वियतनाम जैसे छोटे राष्ट्र को चीन से टक्कर लेने की ताकत दे दी है।


अगले 2-3 दिन में चीन पर हमला कर सकता वियतनाम 

– वेस्टर्न ऑफिशियल के मुताबिक, “वियतनाम ने हाल के महीनों में स्प्राटली आइलैंड्स के 5 बेस पर रॉकेट लॉन्चर्स तैनात किए हैं।”
– “वियतनाम के इस कदम से चीन नाराज हो सकता है।”
– इंटेलिजेंस अफसरों का कहना है, “आसमान से निगरानी के दौरान लॉन्चर्स दिखाई नहीं दिए। उन्हें अभी तक हथियारों से लैस नहीं किया गया है, लेकिन अगले 2-3 दिन में चीन के ठिकानों पर हमला कर सकते हैं।”
क्या कहा वियतनाम ने?
– साउथ चाइना सी के कई आईलैंड्स पर दावा करने वाले वियतनाम की फॉरेन मिनिस्ट्री ने इस रॉकेट लॉन्चर्स की तैनाती पर ज्यादा कुछ कहने से इनकार कर दिया है। इतना जरूर कहा कि ये सूचनाएं सही नहीं हैं।
– जून में डिप्टी डिफेंस मिनिस्टर सीनियर लेफ्टिनेंट नगुएन ची विन्ह कहा था, “वियतनाम का स्प्राटली आइलैंड्स पर किसी तरह के लॉन्चर्स और वेपन्स तैनात करने का इरादा नहीं है। लेकिन ऐसे किसी मुद्दे पर फैसला लेने का हमारा अधिकार सुरक्षित है।”
– अमेरिकी थिंक टैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने साउथ चाइना सी के फियरी क्रॉस, सुबी और मिसचीफ रीफ आईलैंड्स पर 3 हजार मीटर का रनवे बनाया है, ताकि वह वहां फाइटर जेट उतार सके।
– वियतनाम का दावा है कि ये तीनों आईलैंड्स उसके अधिकार वाले 21 आइलैंड्स में ही आते हैं।
चीन ने स्प्राटली पर 1988 में किया था कब्जा
– चीन ने 1988 में वियतनाम नेवी को हराकर स्प्राटली आईलैंड्स पर कब्जा किया था।
– तब वियतनाम ने कहा था कि आईलैँड्स की सिक्युरिटी के दौरान उसके 64 सोल्जर मारे गए।
– बीते कुछ सालों में वियतनाम ने अपनी नेवल कैपिबिलिटीज को मजबूत किया है। उसने रूस से 6 एडवांस्ड सबमरीन भी खरीदी थीं।
– ऑस्ट्रेलियन डिफेंस फोर्स एकेडमी में वियतनाम डिफेंस एक्सपर्ट कार्ल थायर के मुताबिक, “लॉन्चर्स की तैनाती वियतनाम की गंभीरता को दिखाता है। वह चीन को दिखाना चाहता है कि उससे कहीं कम नहीं है।”
क्या है विवाद की असल वजह?
– साउथ चाइना सी का लगभग 35 लाख स्क्वेयर किलोमीटर का एरिया विवादित है।
– इस पर चीन, फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया, ताइवान और ब्रुनेई दावा करते रहे हैं।
– साउथ चाइना सी में तेल और गैस के बड़े भंडार दबे हुए हैं।
– अमेरिका के मुताबिक, इस इलाके में 213 अरब बैरल तेल और 900 ट्रिलियन क्यूबिक फीट नेचुरल गैस का भंडार है।
– वियतनाम इस इलाके में भारत को तेल खोजने की कोशिशों में शामिल होने का न्योता दे चुका है।
– इस समुद्री रास्ते से हर साल 7 ट्रिलियन डॉलर का बिजनेस होता है।
– चीन ने 2013 के आखिर में एक बड़ा प्रोजेक्ट चलाकर पानी में डूबे रीफ एरिया को आर्टिफिशियल आइलैंड में बदल दिया।
– अमेरिका और चीन एक-दूसरे पर इस क्षेत्र को ‘मिलिटराइजेशन’ (सैन्यीकरण) करने का आरोप लगाते रहे हैं।

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