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CRPF का कोर्ट को जवाब। पैलेट गन होगी इस्तेमाल। हम नहीं मानते इस थोपे गए क़ानून को।

देश मोदी

कश्मीर में नहीं बंद होगा पैलेट गन का इस्तेमाल, CRPF चीफ बोले- ये हमारी मजबूरी !!कश्मीर में प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन का इस्तेमाल सिक्युरिटी फोर्सेस बंद नहीं करेंगी। सीआरपीएफ के डीजी दुर्गा प्रसाद ने कहा है कि पैलेट गन से घायल हो रहे यंगस्टर्स को लेकर हम दुखी हैं। लेकिन इसका इस्तेमाल करना हमारी मजबूरी है। बता दें कि सिक्युरिटी फोर्सेस पर पत्थरबाजी करने वालों पर इस गन का इस्तेमाल हो रहा है। इसमें अब तक300 से ज्यादा घायल हो चुके हैं। कोशिश है कि कम घायल हों…

आतंकी बुरहान वानी के एनकाउंटर के बाद कश्मीर में हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं। प्रसाद ने कहा, ‘हम इस बात की पूरी कोशिश कर रहे हैं कि पैलेट गन से कम से कम लोग घायल हों।’ उन्होंने कहा, ‘गन के इस्तेमाल के लिए जवानों को ट्रेनिंग दी गई है लेकिन उन्हें इमोशनल होने को नहीं कहा जाता।”बीते दो हफ्तों में प्रदर्शन के चलते 1,051 जवान घायल हुए हैं।’

‘पैलेट गन नॉन-लीथल वेपन नहीं है’ प्रसाद ने कहा, ‘ये जानलेवा (लीथल) हथियार नहीं है।”जम्मू-कश्मीर अकेला राज्य है जहां लोग जवानों पर पथराव करते हैं। ऐसी स्थिति में उन्हें खुद के बचाव और हालात को काबू में करने के लिए पैलेट गन का इस्तेमाल ही रास्ता रह जाता है।”हमने गन के यूज को लेकर इंस्ट्रक्शन भी दिए है कि इसे घुटने के नीचे के हिस्से पर चलाया जाना चाहिए।’गन से हुई इंजुरी पर प्रसाद ने कहा, ‘सामने से गन तभी चलानी पड़ी जब प्रदर्शनकारी काफी पास आ गए थे। ऐसे में जान जाने की भी आशंका थी।’

प्रसाद ने बताया, ‘हम कम खतरनाक कैटेगरी में आने वाले दूसरे हथियारों का भी एक्सपेरिमेंट कर रहे हैं। इसमें अमेरिका में यूज किया जाने वाला एक वेपन भी शामिल है।’
पैलेट गन के यूज को किया था क्रिटिसाइज
– पैलेट गन के यूज को लेकर काफी क्रिटिसाइज किया गया था।
– हाल ही में कश्मीर के दौरे पर आए होम मिनिस्टर राजनाथ सिंह ने कहा, ”मैं कश्मीर के युवाओं से कहना चाहूंगा कि वे पथराव में शामिल न हों। साथ ही सिक्युरिटी फोर्सेज से भी कहता हूं कि वे पैलेट गन का इस्तेमाल जहां तक संभव हो न करें।’
– राजनाथ ने ये भी कहा था एक संसदीय कमेटी पैलेट गन के यूज को लेकर रिव्यू करेगी। साथ ही उसका कोई अल्टरनेटिव भी खोजेगी।

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पैलेट गन को लेकर क्यों है खौफ?
– कुछ दिन पहले हुए विरोध में प्रदर्शनकारियों के चेहरे और आंखों में पैलेट गन के छर्रे लगने से भारी नुकसान पहुंचा।
– इसके बाद अलगाववादी घाटी में इसे बैन करने की मांग कर रहे थे।
– सिक्युरिटी फोर्सेस ने कश्मीर में आतंकवाद के सपोर्ट में होने वाली हिंसा और प्रदर्शनों को काबू करने के लिए इसका इस्तेमाल करती हैं।
– पहली बार 2010 की हिंसा के दौरान इसका इस्तेमाल हुआ था। तब सौ से ज्यादा मौतें हुई थीं।

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